बर्फी़ली नदिया, बहता जीवन!
बर्फ़ का जम जाना देखो, नदिया का थम जाना देखो, मानो जीवन-विहीन हो गयी हो, मानो कुछ ना बचा हो! मग़र देखो सतह के नीचे ठण्डी हवाओं में भी उफनती दरिया के अंदर, इस सुलगते जीवन के प्रवाह को देखो! देखो, कितनी दूर तक जाती है, अपने में समेटे इस दुनिया को, इस सर्द को चकमा देकर! मानो जैसे कुछ ना बदला हो! जीवन्त जीवन इस दरिया का, रुकता नहीं, थमता नहीं, जमता नहीं! बस चलता रहता है! अम्बर